शल्यपर्व — महाभारत के अठारह पर्वों के इस मौलिक संक्षिप्त गद्य पुनर्कथन में भाग 2/2।
बचे हुए योद्धा विनाश और निस्तब्धता देखते हैं। लगभग हर परिवार ने किसी न किसी प्रियजन को खोया है और विजय का अर्थ कठिन हो जाता है। पाण्डव अधिकार तो पा लेते हैं, पर शोक से मुक्त नहीं हो पाते। युद्ध के अंतिम प्रसंग घृणा और प्रतिशोध के परिणामों की ओर ध्यान ले जाते हैं।
नैतिक जटिलता और दुखद परिणामों सहित संपूर्ण कथाक्रम समझने के लिए अन्य पर्व भी क्रम से पढ़ें।
