सभापर्व — महाभारत के अठारह पर्वों के इस मौलिक संक्षिप्त गद्य पुनर्कथन में भाग 1/2।
युधिष्ठिर का राजसूय यज्ञ सम्मान बढ़ाता है, पर दुर्योधन के मन में ईर्ष्या होती है। शकुनि छलपूर्ण द्यूत क्रीड़ा की योजना बनाता है। राजपाट, धन, स्वतंत्रता और अंततः द्रौपदी तक को दाँव पर लगाया जाता है। द्रौपदी सभा में अन्याय का विरोध करती हैं और धर्म के प्रश्न पर उपस्थित लोगों से उत्तर माँगती हैं।
नैतिक जटिलता और दुखद परिणामों सहित संपूर्ण कथाक्रम समझने के लिए अन्य पर्व भी क्रम से पढ़ें।
