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महाभारत · Karna Parva

कर्ण का सेनापतित्व

कर्णपर्व — महाभारत के अठारह पर्वों के इस मौलिक संक्षिप्त गद्य पुनर्कथन में भाग 1/2।

कर्ण का सेनापतित्व

कर्णपर्व — महाभारत के अठारह पर्वों के इस मौलिक संक्षिप्त गद्य पुनर्कथन में भाग 1/2।

द्रोण के बाद कर्ण सेनापति बनते हैं। उनका जीवन असाधारण दानशीलता, दुर्योधन के प्रति निष्ठा और बार-बार मिले अपमान से जुड़ा है। भारी क्षति के बीच अर्जुन से उनकी प्रतिद्वन्द्विता निर्णायक मोड़ पर पहुँचती है। महाकाव्य कर्ण को सरल अच्छे-बुरे खाँचे में नहीं रखता।

नैतिक जटिलता और दुखद परिणामों सहित संपूर्ण कथाक्रम समझने के लिए अन्य पर्व भी क्रम से पढ़ें।

पाठ संबंधी सूचना

यह हमारा मौलिक संक्षिप्त पुनर्कथन/मार्गदर्शक है; मूल ग्रंथ के समस्त श्लोक या किसी आधुनिक अनुवाद की प्रतिलिपि नहीं है। अलग परंपराओं में कुछ विवरण अलग हो सकते हैं।

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