महाप्रस्थानिकपर्व — महाभारत के अठारह पर्वों के इस मौलिक संक्षिप्त गद्य पुनर्कथन में भाग 2/2।
स्वर्ग के द्वार पर युधिष्ठिर उस वफादार कुत्ते को छोड़ने से मना करते हैं जिसने पूरी यात्रा साथ निभाई है। वह जीव उनकी धर्मनिष्ठा की दैवी परीक्षा का भाग निकलता है। यह प्रसंग स्वर्गीय फल की इच्छा से ऊपर निष्ठा और करुणा को रखता है।
नैतिक जटिलता और दुखद परिणामों सहित संपूर्ण कथाक्रम समझने के लिए अन्य पर्व भी क्रम से पढ़ें।
