मौसलपर्व — महाभारत के अठारह पर्वों के इस मौलिक संक्षिप्त गद्य पुनर्कथन में भाग 2/2।
पारंपरिक कथा में वन में कृष्ण की पृथ्वी-लीला समाप्त होती है और अर्जुन अपनी पुरानी शक्ति की सीमाओं का अनुभव करते हैं। वे उजड़े नगर से बचे लोगों की रक्षा का प्रयास करते हैं। कृष्ण का जाना पाण्डवों की दुनिया बदल देता है और वे त्याग के मार्ग की ओर बढ़ते हैं।
नैतिक जटिलता और दुखद परिणामों सहित संपूर्ण कथाक्रम समझने के लिए अन्य पर्व भी क्रम से पढ़ें।
