उत्तरकाण्ड — 3 में से भाग 2। यह परंपरागत रामकथा का मौलिक गद्य पुनर्कथन है; मूल श्लोकों का शब्दशः अनुवाद नहीं।
वाल्मीकि आश्रम में सीता लव और कुश का पालन-पोषण करती हैं। दोनों बालक विद्या और सदाचार सीखते हैं तथा रामकथा का गान भी करते हैं। बाद में वे राजसभा में इस कथा को सुनाते हैं। उनके गायन से अतीत की घटनाएँ फिर सामने आती हैं और सत्य, स्मृति तथा पारिवारिक संबंधों के प्रश्न उठते हैं।
यह प्रसंग धर्म, करुणा और निर्णयों के परिणाम पर विचार करने की प्रेरणा देता है। संपूर्ण कथा का क्रम समझने के लिए काण्ड के अगले अध्याय भी पढ़ें।
