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श्रद्धा, शांति और सकारात्मक भावना के साथ इस पाठ को पढ़ें। क्षेत्र एवं परंपरा के अनुसार पूजा-विधि में अंतर हो सकता है।

शुभारंभ के समय गाया जाने वाला यह प्रार्थना श्लोक गणपति से बाधाओं के निवारण की कामना करता है।

वक्रतुंड महाकाय मंत्र का परिचय

शुभारंभ के समय गाया जाने वाला यह प्रार्थना श्लोक गणपति से बाधाओं के निवारण की कामना करता है। भक्ति-पाठ का उद्देश्य केवल शब्दों को दोहराना नहीं, बल्कि उनके भाव को जीवन में अपनाना भी है। शांत मन और सम्मानपूर्ण वातावरण के साथ इसे पढ़ें।

मंत्र का पाठ

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

सरल अर्थ और भाव

शुभारंभ के समय गाया जाने वाला यह प्रार्थना श्लोक गणपति से बाधाओं के निवारण की कामना करता है। मंत्र में समर्पण, सद्बुद्धि और सभी के कल्याण की भावना विकसित करने पर ध्यान दें। शब्दार्थ तथा उच्चारण का अभ्यास करते समय किसी विश्वसनीय परंपरा या योग्य शिक्षक का मार्गदर्शन उपयोगी हो सकता है।

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जप कैसे करें?

  • प्रातः या अपनी सुविधा के अनुसार शांत समय चुनें।
  • स्वच्छ स्थान पर सहज आसन में बैठकर कुछ क्षण श्वास सामान्य करें।
  • मंत्र को धीरे और स्पष्ट उच्चारित करें; चाहें तो 11 या 21 बार जप कर सकते हैं।
  • अंत में कृतज्ञता व्यक्त करें और अपनी दिनचर्या में करुणा तथा संयम रखें।
संख्या, उच्चारण और विधि परिवार तथा संप्रदाय के अनुसार अलग हो सकती है।